आरटीआई से खुला बड़ा खुलासा, शिकायतकर्ता अब हाईकोर्ट में PIL की तैयारी में

प्रतापपुर। सरनापारा, प्रतापपुर में निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) के करोड़ों रुपये के भवन निर्माण में गंभीर तकनीकी और संरचनात्मक खामियां सामने आने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दो अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में कुछ हिस्सों को ध्वस्त (डिस्मेंटल) कर दोबारा बनाने तक की अनुशंसा की गई, लेकिन अब तक किसी अधिकारी, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पहली जांच 29 सितंबर 2025 को एसडीएम प्रतापपुर की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने की थी, जबकि दूसरी जांच 9 जून 2026 को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई। दोनों रिपोर्टों में स्कूल भवन, छात्रावास और वार्डन भवन में एक्सपेंशन जॉइंट की खामियां, स्लैब दबना, हाफ ब्रिक वॉल में आवश्यक स्टील का अभाव, कॉलमों में हनीकॉम्बिंग, कंक्रीट की गुणवत्ता पर सवाल, खराब प्लास्टर, टूटी टाइल्स, टेढ़े कॉलम, सेंटरिंग की त्रुटियां और फ्लाई ऐश ईंटों का बिना भिगोए उपयोग जैसी गंभीर कमियां दर्ज की गईं।

जांच समिति ने स्पष्ट किया कि कई कमियां भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। ब्लॉक-03 के रैंप कॉलम सहित कुछ हिस्सों को तोड़कर दोबारा निर्माण कराने की अनुशंसा भी रिपोर्ट में दर्ज है। साथ ही निर्माण एजेंसी WAPCOS द्वारा पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती नहीं किए जाने और गुणवत्तापूर्ण निगरानी के अभाव की भी टिप्पणी की गई।
शिकायतकर्ता की शिकायत पर 13 जून 2026 को सरगुजा संभाग आयुक्त कार्यालय ने भी तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। इस दौरान निर्माण गुणवत्ता, बीम, किचन स्ट्रक्चर, तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण सामग्री की जांच की गई।
मामले में निर्माण कार्य में उपयोग हुई लगभग 4700 से अधिक ट्रैक्टर रेत की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिटपास और रॉयल्टी दस्तावेजों की भी निष्पक्ष जांच नहीं हुई।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लगातार दो जांचों और उच्चस्तरीय निरीक्षण के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वे अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से कोर कटिंग टेस्ट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए तथा दोषी अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विद्यालय आदिवासी क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में गुणवत्ता से समझौता केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा का भी गंभीर विषय है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दो-दो जांचों में गंभीर खामियां दर्ज हो चुकी हैं, तब भी करोड़ों रुपये का निर्माण कार्य आखिर किसके संरक्षण में जारी है?