आंगनबाड़ी में मासूम पर कुत्ते का हमला: सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा में, जिला से सेक्टर तक अफसरों की लापरवाही बेनकाब

सूरजपुर/प्रेमनगर । दो साल की मासूम पंडो जनजाति की बच्ची पर आंगनबाड़ी केंद्र में आवारा कुत्ते का हमला… यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही की इबारत है।यह हमारा नहीं वरन जिले के प्रेमनगर विकासखंड के चंद्रनगर आंगनबाड़ी में यह दिल दहला देने वाली वारदात बयां कर रही है। बालू में खेल रही बच्ची के दाहिने हाथ पर कुत्ते ने काट लिया। घायल मासूम को प्रेमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां रेबीज का टीका लगाया गया। लेकिन सवाल वही पुराना-क्यों केंद्रों में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं..? क्यों सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों को जिला से लेकर विकासखंड और सेक्टर अधिकारी कागजों तक सीमित रखे हुए हैं…?
कई केंद्र में खुले में संचालित, अफसरों की बंद आंखें-कुत्तों व जानवरों का बेरोकटोक राज
उक्त घटना की जानकारी सार्वजनिक होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वहीं दूसरी तरफ बच्ची के माता-पिता भुनेश्वरी पंडो और शनि लाल पांडे ने आक्रोश जताते हुए नाराजगी जाहिर किया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कार्यकर्ता-सहायिका बच्चों की निगरानी के बजाय कागजी कामों में उलझी रहती हैं। आपकों बताते चलें कि जिले में चंद्रनगर जैसे कई केंद्रों पर बाड़ लगाने, कुत्तों को भगाने सहित सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी आवश्यकता लंबित पड़ी हुई है। जिसके कारण यह घटना सामने आई जो स्पष्ट तौर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों की लापरवाही को जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के ‘डॉग-फ्री जोन’ आदेश की अवमानना प्रदर्शित करता है।

सुप्रीम कोर्ट का फरमान कागजी, जमीनी हकीकत आया सामने
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सभी शैक्षणिक संस्थानों—जिसमें आंगनबाड़ी केंद्र भी शामिल हैं—को डॉग-फ्री बनाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साफ निर्देश दिए थे। लेकिन सूरजपुर जिले में यह आदेश सिर्फ फाइलों में कैद है, चंद्रनगर जैसी घटना साबित करती है कि जिला सेक्टर अधिकारी से लेकर विकासखंड स्तरीय अफसरों की मिलीभगत से लापरवाही चरम पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि बजट आवंटन के बहाने से सुरक्षा व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। अगर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता बरती जाती तो आज यह मासूम घायल न होती। वैसे तो जिले भर में सैकड़ों आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत ऐसी ही-खुले में संचालित केंद्र, जहां कुत्ते-बिल्लियां और सांप-बिच्छू बेधड़क घूमते हैं।

हमर उत्थान सेवा समिति का एलान: दोषी अफसरों पर कार्रवाई, वरना आंदोलन
घटना ने पंडोपारा में दहशत और रोष फैला दिया। हमर उत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश साहू ने इसे ‘प्रशासनिक विफलता’ करार देते हुए जिला प्रशासन से मांग की—दोषी कार्यकर्ता, सहायिका, विकासखंड अधिकारी और सेक्टर सुपरवाइजर पर तत्काल कार्रवाई हो साथ ही सभी केंद्रों में जल्द से जल्द बाउंड्रीवाल और सुरक्षा व्यवस्था पूरी करें, वरना ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे।
योजनाएं कागजों में सिमटीं तो मासूमों का भविष्य खतरे में
यह घटना जिले के लिए घंटी है-कागजी योजनाएं और बैठकें तब तक बेकार, जब तक जमीनी अमल न हो। ग्रामीणों का कहना सही है: समय रहते जिला से लेकर सेक्टर स्तर के अफसर सक्रिय होते, तो यह त्रासदी टल सकती थी। अब सवाल उठता है-कब तक मासूमों को लापरवाही का शिकार बनने देंगे..? विभाग को फौरन कदम उठाने होंगे, वरना रहवासियों का गुस्सा और भड़केगा।

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