
प्रेमनगर। प्रेमनगर तहसील क्षेत्र में इन दिनों गिरदावरी को लेकर अजब-गजब हालात बने हुए हैं। भौतिक सत्यापन किए बिना ही कागजों में गिरदावरी पूरी कर देने का गंभीर आरोप सामने आ रहा है। स्थिति यह है कि कई दर्जन किसानों का रकबा अचानक शून्य कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके के किसान गहरे संकट में हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी किसान हैं, जिनके नाम वन अधिकार पत्र होने के बावजूद भी खेतों को शून्य रकबा दिखा दिया गया है।

किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसल मौजूद है, लेकिन रिकॉर्ड में रकबा गायब कर दिया गया है। समिति जाने पर उन्हें तहसील भेजा जाता है, और तहसील में कहा जाता है “पहले तहसीलदार से मार्क करवा कर लाओ।” किसान बताते हैं कि कई-कई दिनों से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, परंतु न तो तहसीलदार मिलते हैं और न ही सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है।
उधर, गिरदावरी में गड़बड़ी के कारण धान खरीदी के टोकन भी नहीं कट रहे, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि भौतिक सत्यापन अभी भी लंबित दिखा रहा है, जबकि मौके पर किसी अधिकारी ने खेतों का निरीक्षण किया ही नहीं। किसानों का आरोप है कि रिकॉर्ड में “अनाप-शनाप एंट्री” कर दी गई है, जिसका परिणाम अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
प्रभावित किसानों में सबसे अधिक संख्या जनजातीय समुदाय की है। कई आदिवासी किसानों ने बताया कि वन अधिकार पत्र होने के बावजूद भी उनका रकबा शून्य कर दिया गया है, जबकि उसी जमीन पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं।
स्थिति यह है कि रकबा संशोधन का समय बहुत कम बचा है, और एक ही दिन में सैकड़ों किसानों की गलती कैसे सुधरेगी यह बड़ा सवाल है। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा और सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गिरदावरी की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और तत्काल भौतिक सत्यापन कराकर रकबा बहाल किया जाए, ताकि धान खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो सके।
फिलहाल प्रेमनगर के किसान असमंजस, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के बीच फंसे हुए हैं। यदि हालात समय रहते नहीं सुधरे, तो इसका असर जिले की धान खरीदी व्यवस्था पर भी गहराई से पड़ सकता है।