
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान होने वाली गड़बड़ियों, अवैध परिवहन और धान की हेराफेरी पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और धान के परिवहन से लेकर भंडारण तक की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए प्रत्येक बोरी पर QR कोड लगाने और धान से भरी गाड़ियों की GPS के माध्यम से ट्रैकिंग करने की व्यवस्था को लेकर पहल की जा रही है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य धान खरीदी केंद्रों से मिलों और भंडारण केंद्रों तक पहुंचने वाले धान की आवाजाही पर निगरानी रखना तथा रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक मात्रा के बीच किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम करना है।
हर बोरी की होगी डिजिटल पहचान
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत धान की बोरियों पर QR कोड लगाए जाने से प्रत्येक बोरी की पहचान डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी। QR कोड को स्कैन करके धान से संबंधित उपलब्ध जानकारी का सत्यापन किया जा सकेगा। इससे धान की बोरियों की आवाजाही का रिकॉर्ड रखने और जरूरत पड़ने पर उनकी जानकारी का मिलान करने में मदद मिल सकती है।
इस व्यवस्था से यह पता लगाने में आसानी होगी कि धान किस खरीदी केंद्र से आया है और उसे किस मिल या भंडारण केंद्र तक पहुंचाया जाना है। इससे धान की अदला-बदली, अवैध तरीके से परिवहन और रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
GPS से होगी धान की गाड़ियों की निगरानी
धान परिवहन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए धान से भरी गाड़ियों की GPS ट्रैकिंग भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। GPS के माध्यम से वाहनों की लोकेशन और निर्धारित मार्ग पर उनकी आवाजाही की निगरानी की जा सकेगी।
यदि कोई वाहन निर्धारित मार्ग से अलग जाता है, तो निगरानी व्यवस्था के जरिए उसकी गतिविधियों की जांच करने में मदद मिल सकती है। इससे धान के परिवहन के दौरान होने वाली संभावित गड़बड़ियों का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासन को सहायता मिलेगी।
धान खरीदी व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता
छत्तीसगढ़ धान उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। यहां समर्थन मूल्य पर बड़ी मात्रा में धान की खरीदी की जाती है। ऐसे में खरीदी केंद्रों, परिवहन वाहनों, मिलों और भंडारण केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है।
डिजिटल पहचान और GPS ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से धान की आवक, परिवहन और उपलब्ध स्टॉक का मिलान करना आसान हो सकता है। इससे निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।
किसानों को भी मिल सकता है फायदा
धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने से वास्तविक किसानों की उपज का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने और खरीदी व्यवस्था में अनियमितताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, प्रशासन के लिए धान के स्टॉक और परिवहन से संबंधित जानकारी का सत्यापन करना आसान होगा।
हालांकि, QR कोड और GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था को किस तारीख से लागू किया जाएगा, इसे किन जिलों और खरीदी केंद्रों में पहले शुरू किया जाएगा तथा इसके संचालन के लिए क्या दिशा-निर्देश होंगे, इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष: धान की प्रत्येक बोरी की डिजिटल पहचान और परिवहन वाहनों की GPS ट्रैकिंग से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में मदद मिल सकती है। इस पहल का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर धान की हेराफेरी रोकने, परिवहन पर नजर रखने और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।